कोरोनाकाल में जन्म लेने से पहले ही बच्चों की थम रही सांसें

दौसा. महिलाओं के गर्भ पर भी कोरोनाकाल भारी पड़ रहा है। गर्भवती के पेट में ही जन्म लेने से पहले बच्चों की आखिरी समय में सांसें थम रही है। इस तरह के मामले दौसा जिला अस्पताल में लगातार सामने आ रहे हैं। खास बात यह है कि गर्भधारण की पूरी प्रक्रिया के दौरान सब सही चल रहा होता है और अचानक छठे माह से लेकर प्रसव होने तक के मध्य में बच्चे की सांस थम जाती है। चिकित्सक भी ऐसे मामलों से हैरान हैं और परिजनों को बच्चे की गर्भ में मौत के कारण सटीक तरह से नहीं बता पा रहे हैं।


दौसा के चिकित्सकों की माने तो प्रदेशभर में यह समस्या खड़ी हो गई है तथा विशेषज्ञों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है। दौसा अस्पताल में गत डेढ़ माह में गर्भ के अंदर ही 24 बच्चों की मौत हो चुकी है। जबकि कोरोनाकाल से पहले इस तरह के महीन में दो-तीन मामले ही सामने आते थे। इसके अलावा शुरुआती तीन-चार माह में भी महिलाओं के परेशानी होने से गर्भपात के मामलों में भी काफी वृद्धि हुई है, लेकिन उनका कोई रेकॉर्ड नहीं होता है। ऐसे में अब गर्भवती महिलाओं को कोरोनाकाल में सुरक्षित रहने के लिए चिकित्सक खास सलाह दे रहे हैं।

गर्भधारण से लेकर प्रसव तक साफ-सफाई, सामाजिक दूरी, मास्क, सेनेटाइजर आदि का उपयोग कर कोरोना के लक्षणों से बचाने पर जोर दिया जा रहा है। दौसा अस्पताल में आने वाले गर्भवती महिलाओं को अब खासतौर पर कहा जा रहा है कि किसी भी तरह का इंफेक्शन नजर आने पर चिकित्सक की सलाह से ही दवा लें, अन्यथा खतरा होने की आशंका खड़ी हो जाएगी। गौरतलब है कि फिलहाल गर्भवती महिलाओं का कोविड वैक्सीनेशन भी नहीं होता है, ऐसे में उनके समक्ष खतरा अधिक है।

केस 1

दौसा के समीप खेड़ली की एक गर्भवती महिला की दौसा में प्रसव से पहले सोनोग्राफी कराई गई तो चिकित्सकों ने बच्चा स्वस्थ्य पाया, अगले ही दिन जब तकलीफ होने पर परिजन जयपुर ले गए तो वहां सोनोग्राफी में बच्चा मृत देखा गया।
केस 2
बसवा क्षेत्र की एक महिला के आठवें माह में गर्भ में अचानक बच्चे ने मूवमेंट करना बंद कर दिया। चिकित्सकों को दिखाया तो सामने आया कि बच्चे की गर्भ में मौत हो गई है। मौत का कारण चिकित्सकों के भी समझ में नहीं आया।

संक्रमण से खून के प्रवाह में रुकावट हो सकता है कारण

गभर्वती महिलाओं में आईयूडी (इंट्रा यूटेराइन डेथ) अर्थात पेट के अंदर बच्चे की मौत होने के मामलों में अचानक बढ़ोतरी हो रही है। इसके संभावित कारण महिलाओं के अंदर कोरोना जैसा हल्का इंफेक्शन रहा हो। इसके चलते कोग्यूलेशन प्रोफाइल बढऩे या प्लेसंटा की वेसल्स में थक्का जमने से बच्चों को ठीक ढंग से खून का प्रवाह नहीं मिल पाता और पेट के अंदर मृत्यु हो रही है। ऐसे में गर्भवती महिला को बदन दर्द, थकान, खांसी आदि होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए, ताकि जांच कर उचित उपचार मिल सकेगा।
डॉ. राजेश गुर्जर, स्त्री एवं प्रसूता रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल दौसा

कोरोनाकाल में जन्म लेने से पहले ही बच्चों की थम रही सांसें

source https://www.patrika.com/dausa-news/children-s-breath-stopped-even-before-they-were-born-in-the-coronary-p-6863465/

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