लालसोट व मंडावरी मंडी में नई सरसों की आवक शुरू

लालसोट. लालसोट व मंडावरी कृषि उपज मंडियों में पिछले दो-तीन माह की कारोबारी सुस्तीके बाद नई सरसों की आवक के चलते रौनक लौट आई है। दोनों मंडियों में सरसों की आवक गति पकडऩे लगी है। आढ़तियों की दुकानों के आगे सरसों के ढेर नजर आने लगे हैं।
लालसोट मंडी में जहां नई सरसों की आवक दो हजार कट्टे तक हो गई है तो मंडावरी मंडी में प्रतिदिन करीब साढ़े तीन हजार कट्टों की आवक हो रही है। फिलहाल ग्रामीण इलाकों में अगेती सरसों की कटाई का काम जारी है। अनुमान है कि आने वाले दिनों भी इसी तरह मौसम साफ रहा और धूप खिलती रही तो एक पखवाड़े बाद दोनों मंडियों में नई सरसों की आवक पन्द्रह हजार कट्टों तक भी पहुंच सकती है। दोनों मंडियों में आढ़तियों की दुकानों पर सुबह से ही किसान अपने वाहनों से सरसों लेकर पहुंच रहे हंै। फिलहाल कुछ नमी के चलते किसान सरसों को कट्टों या बोरी में भरने के बजाए सीधे ही ट्रॉली या जुगाड़ में भरकर मंडी ला रहे है और मंडियों में भी खुले में ही ढेरिया लगाई जा रही है, जिससे सरसों की नमी थोड़ी कम हो सके।

गत वर्ष से डेढ़ गुना अधिक दाम, किसान खुश
फिलहाल नई सरसों में 10 प्रतिशत तक की नमी होने के बाद भी इस बार किसानों को गत वर्ष के मुकाबले डेढ़ गुना अधिक दाम मिल रहे हैं। अच्छे दाम मिलते देख मंडियों मेंं आने वाले किसान भी खुश नजर आ रहे है। ग्रेन मर्चेन्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नवल झालानी व मंडावरी व्यापार मंडल के सरंक्षक रामजीलाल गांधी समेत कई आढ़तियों ने बताया कि इस वर्ष सीजन की शुरुआत के साथ ही बड़े खरीदारों की डिमांड आना शुरू हो गई है, जिसके चलते किसानों को दाम भी बेहतर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष सीजन की शुरुआत में किसानों को नई सरसों केे दाम 3400 से 3850 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से मिल रहे थे। इस बार मंडियों में नई सरसों नई सरसों के दाम किसानों को 5200 से 5800 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मिल रहे हैं।
गेहूं, चना व सौंफ में अभी वक्त : मंडियों में सरसों की आवक 15 मार्च से जोर पकड़ेगी। बाद में यह आवक 50 हजार कट्टों तक पहुुंच जाएगी। दोनों मंडियों में आने वाली सरसों में तेल की मात्रा अधिक होने से देश के कई प्रांतों में यहां से सरसों का निर्यात होता है। अप्रेल की शुरुआत में गेहंू, चना व सौंफ की आवक शुरू होगी।

बंपर पैदावार का है अनुमान
लालसोट व मंडावरी मंडियों में सर्वाधिक सरसों की आवक लालसोट क्षेत्र के साथ सवाईमाधोपुर जिले के बामनवास, बौली, मलारणा चौड़ व मलारणा डूंगर क्षेत्र के गांवों से होती है। यह पूरा क्षेत्र मोरेल क्षेत्र की नहरों से होने वाली सिंचाई पर ही निर्भर रहता है। इस बांध के निकलने वाली पूर्वी नहर से इस बार करीब एक माह तक किसानों को पानी मिला था और मुख्य नहर तो एक माह से अधिक समय तक चली थी। पूर्वी नहर से लालसोट के कल्याणपुरा, कांकरिया, कानलोंदा, अचलपुरा, रायपुरा गांवों सिचाई होती है और मुख्य नहर से सवाई माधोपुर जिले की बामनवास, बौली व मलारणा डूंगर क्षेत्र के दर्जनों गांवों की सैकड़ों हैक्टेयर भूमि की सिचाई होती है। ऐसे में इन गांवोंं सरसों की बंपर पैदावार होने के अनुमान से दोनों मंडियों के आढ़तिए उत्साहित हैं।



source https://www.patrika.com/dausa-news/new-mustard-arrivals-in-lalsot-and-mandavari-mandi-6719481/

Comments

Popular posts from this blog

दौसा जिले की सीमा पर चौकसी शुरू, पुलिस प्रशासन का सख्त पहरा

दौसा. मोरेल बांध पर मिले 6 हजार 275 जलीय पक्षी

कोरोना से हुई मौतों की ऑडिट, तीसरी लहर से लडऩे की रखनी होगी तैयारी