मोरेल बांध की नहरों में छोड़ा पानी, दौड़ी खुशी की लहर

लालसोट(दौसा). उपखण्ड क्षेत्र में कांकरिया ग्राम पंचायत के पास स्थित एशिया के सबसे बड़े कच्चे बांध मोरेल बांध की दोनों नहरों में बुधवार दोपहर पानी छोड़ा गया। बांध की पूर्वी नहर व मुख्य नहरों में पानी छोडऩे के मौके पर जल संसाधन विभाग के अभियंताओं ने बांध की मोरी के वॉल्व की विधिवत पूजा अर्चना की। इसके बाद अभियंताओं ने वॉल्व की चाबी को घुमाकर नहरों में पानी छोड़़े जाने शुरुआत की। नहरों में पानी का बहाव होता देख ग्रामीणों में खुशी दौड़ गई और उन्होंने जयकारे भी लगाए।

आसपास बसे गांवों के किसान नहर से पानी अपने खेत तक पहुंचाने के प्रयासों में जुट गए। विभाग के कार्यवाहक सहायक अभियंता विजेन्द्र सैनी,कनिष्ठ अभियंता सपना जोरवाल, मलारना चौड़ के सहायक अभियंता चेतराम मीना, चेतन मीना, रामस्वरुप मीना एवं जल वितरण कमेटी के अध्यक्ष कांजीलाल मीना व पदाधिकारियों समेत कई ग्रामीण भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बांध की पाल पर मौजूद पीर बाबा की मजार पर पहुंच कर फूल भी चढ़ाए। नहरों में पानी छोड़े जाने के बाद ग्रामीणों का मुंह मीठा कराया गया।

पूर्वी नहर में 15 व मुख्य नहर में 21 दिन तक बहेगा अमृत

कार्यवाहक सहायक अभियंता विजेन्द्र सैनी ने बताया कि बांध में पानी का गेज फिलहाल 16 फीट तीन इंच है और 1046.50 मिलियन घन फीट पानी बांध में उपलब्ध है। बांध की पूर्वी नहर में 15 दिनों एवं मुख्य नहर में 21 दिनों तक पानी छोड़ा जाएगा। गौरतलब है किमोरेल बांध गत वर्ष 21 साल बाद पहली बार पूरा भरा था। इससे पूर्व सन 1998 में बांध पूरा भरा था।

1952 में बना था मोरेल बांध

लालसोट उपखण्ड मुख्यालय से करीब 17 किमी की दूरी पर मोरेल बांध कांकरिया गांव के पास मोरेल नदी पर वर्ष 1952 में बनाया गया था। मोरेल नदी बनास नदी की सहायक नदी है। मोरेल नदी सवाई माधोपुर जिले में मलारणा डूंगर रेलवे स्टेशन के पास बनास नदी में मिलती है।


मोरेल बांध की फैक्ट फाइल

बांध का निर्माण- सन 1948 में शुरू
बांध का निर्माण कार्य पूरा- सन 1952

कुल भराव क्षमता- 30 फीट 5 इंच
बांध की नहरें- पूर्वी नहर व मुख्य नहर

बांध में पानी का फैलाव- करीब 10 किमी
नहरों की लंबाई:- पूर्वी नहर (31.4 किमी) मुख्य नहर (28 किमी)

कितने जिलों में होंगी सिचाई- दौसा व सवाई माधोपुर
बांध की माइनर नहरें - 29, (पूर्वी नहर माइनर 21.53 किमी) (मुख्य नहर माइनर 76.85 किमी)

कितने क्षेत्र में होगी सिंचाई- पूर्व नहर से 6705 हैक्टेयर भूमि, मुख्य नहर से 12 हजार 388 हैक्टेयर भूमि
कौन से गांवों में होगी सिंचाई:- मुख्य नहर से बांैली व मलारना डूंगर के 55 गांव और पूर्व नहर से लालसोट व बामनवास के 28 गांव

मोरेल बांध की नहरों में छोड़ा पानी, दौड़ी खुशी की लहर

source https://www.patrika.com/dausa-news/water-left-in-the-canals-of-morel-dam-ran-a-wave-of-happiness-6537526/

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